कथनी और करनी | Hindi Stories with Moral | Hindi Kahaniya

मानव जीवन प्रभु की अनमोल देन है। सभी प्राणियों में मनुष्य को प्रभु ने विशिष्ट शक्तियाँ प्रदान की हैं, इसलिए वह संसार में बहुत ही अच्छे ढ़ग से जीवनयापन करता है। मगर सभी लोग हर समय सही काम नहीं करते हैं। कई बार मनुष्य कहता कुछ है और करता कुछ है। कई मनुष्यों को कथनी और करनी में अंतर देखने को मिलता है, इस बात को प्रस्तुत कहानी में उजागर किया है।

कथनी और करनी | Hindi Stories with Moral | Hindi Kahaniya

कथनी और करनी

ईश्वर ने मनुष्य को अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ बनाया है। कई गुणों से उसे सँवारा है। इसका उसे अभिमान भी होता है। परन्तु स्वयं को गुणों की खान समझने वाला व्यक्ति कई बार ऐसे कार्य करता है, जिन्हें वह ग़लत बताता है। कथनी और करनी में अन्तर के ऐसे कई उदाहरण रोज देखने में आते हैं।

बस्ती के बीन सरकार ने पार्क बनाने की जगह छोड़ रखी थी। बरसात के मौसम में मुहल्ले के एक सज्जन को उसमें फूलों के पौधे लगाने की सूझी। बात अच्छी थी। वे कहीं से पौधे लाए. कतार से उन्हें रोपा। देखभाल की। पौधे बड़े हो गए. कुछ दिनों बाद फूल खिलने लगे। पार्क अच्छा लगने लगा। मुहल्ले के लोग सुबह-शाम पार्क में टहलने लगे।

फूल सबको अच्छे लगते हैं। पार्क में लोगों के आने-जाने से उन्हें यह लगा कि लोग इन फूलों को तोड़ कर ले जाएँगे। उन्होनें एक तख्ती के ऊपर यह लिखकर टांग दिया कि, " फूल तोड़ना मना है। 

"आते-जाते सब उसको पढ़ते, कोई भी फूलों को नहीं तोड़ता। पर मजे की बात तब सामने आई जब लोगों ने तख्ती लगाने वाले सज्जन को बड़े सवेरे जल्दी-जल्दी फूल तोड़ते देखा। वे अपनी शर्म मिटाने के लिए बोले," पूजा के लिए तोड़ रहा हूँ। (Hindi Stories with Moral)

"बसों में लिखा होता है," धूम्रपान करना निषेध है। "एक बार यात्रा करते हुए देखा कि एक यात्री ने बीड़ी जलाई और पीने लगा। उसे देखकर कंडक्टर ने कहा," भाई साहब, बस में बीड़ी-सिगरेट पीना मना है। " उसने जलती बीड़ी खिड़की से बाहर फेंकवा दी। 

थोड़ी देर बाद कंडक्टर ड्राइवर के केबिन में जाकर बैठा, सिगरेट जलाई और दोनों पीने गले। एक दूसरे यात्री ने यह देखा तो लिखे हए वाक्य की तरफ इशारा करते हुए कंडक्टर से कहने लगे, "भाई साहब । बस में सिगरेट पीना मना है।" "इस पर कंडक्टर शीघ्र बोल उठा, यह वाक्य आपके लिए है, न कि हमारे लिए। 

"एक व्यक्ति दुकान पर गया। स्कूटर दुकान के सामने खड़ा कर हो रहा था कि दुकानदार बोला," आप अपना स्कूटर वहाँ सामने वाहन रखने के स्थान पर खड़ा करके आएँ। "सज्जन ने कहा," मुझे ज़्यादा समय तक थोड़े हो ल्कना है, मैं तो सामान लेकर अभी चला जाऊँगा। "दुकानदार बोला," पर दुकान के सामने बीच सड़क पर स्कूटर खड़ा रखना कोई ठीक बात नहीं।"

सज्जन ने स्कूटर वाहन खड़ा करने के स्थान पर ले जाकर खड़ा किया और वापस आकर सामान खरीदने लगे। इतने में स्कूटर लेकर दुकान पर एक लड़का आया स्कूटर दुकान के सामने खड़ा करके वह दुकान के अन्दर चला गया। इस पर उस सजन ने दुकानदार से कहा, "आपने इसे मना नहीं किया।" वह बोला, "यह तो मेरा बेटा है।"

कुल लोग ऐसे भी होते हैं जो आदर्श की बातें करते हैं लेकिन जब उन्हें अपनाना पड़े तो वे आदर्श भूल जाते हैं।

एक दिन एक सज्जन के घर उनके मित्र मिलने आए. दोनों मित्र बातचीत में मग्न थे कि किसी ने दरवाजा खटखटाया। उन्होंने खिड़की से झाँककर देखा, बाहर मकान मालिक खड़ा था, जो पिछले चार माह का किराया माँगने बार-बार आ रहा था। उन्होंने अपने बच्चे को समझाकर बाहर भेजा। 


Kathani aur Karni


जब बच्चा बाहर गया तो मकान मालिक ने उससे कहा, "तुम्हारे पिताजी से कहो कि मैं मकान का किराया लेने आया हूँ।" बच्चे ने तपाक से जवाब दिया, "पिताजी ने कहा है कि वे घर पर नहीं हैं।" बच्चे की बात सुनकर मकान मालिक हँसने लगा। घर में बैठे मित्र के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई. जिसे देखकर वे सजन पानी-पानी हो गए। 

एक सज्जन ने अपने पोते को यह सिखाया था कि हमें कभी किसी काम को ग़लत ढंग से नहीं करना चाहिए. सदा अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी चाहिए। (Hindi Stories with Moral)  

एक दिन की बात है, वे जल-बिजली के बिल जमा कराने गए. साथ में उनका आठ वर्षीय पोता भी था। 

बिल जमा करानेवालों की लम्बी कतार देखकर वे कोई उपाय सोचने लगे। उन्होंने खड़े हुए लोगों को ध्यान से देखा। आगे हो एक परिचित व्यक्ति खड़ा दिखाई दिया। वे तुरन्त उसके पास गए और बोले, "बेटा ये चिल तुम घर पर ही भूल आए लो इसको भी जमा करा दो।" वह व्यक्ति कुछ बोले, उससे पहले ही बिल व राशि उसके हाथ में थमा दी और एक तरफ जाकर खड़े हो गए. पोता बार-बार कहने लगा, "दादाजी लाइन में लगिए ग।" उसकी बात सुनकर लोग हँसने लगे। 

कई लोग ऐसे होते हैं, जो आदर्श की बातें तो करते हैं, पर उन्हें अपनाते नहीं। इस प्रकार का आचरण अच्छा नहीं होता। ऐसा आचरण करनेवालों को कभी सम्मान नहीं मिलता। वे हंसो के पात्र बनते हैं। इसलिए हमें कथनी और करनी में सदैव समानता रखनी चाहिए. 

हो कथनी-करनी एक समान 
  जग में मिलता तब सम्मान।  
 
Note: इस वार्ता(story) को किस लेखक(author) ने लिखा है वो में जनता नही हु, अगर आप कोई जानते हो तो Comment Box में जरूर लिखे।
 

मित्रो, मै आशा करता हु की आपको हमारी यह कुत्ते की वफादारी, कथनी और करनी | Hindi Stories with Moral | Hindi Kahaniya पोस्ट पसंद आयी होगी। और ऐसी ही अच्छी-अच्छी कहानिया पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट को visit करते रहिए।
Raj Kagadiya

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